
पानसेमल। ( रविन्द्र सोनिस कि खबर ) संस्कार शिक्षा निकेतन, पानसेमल में देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर भगवान श्री विट्ठल-रुक्मिणी के जयघोष एवं भजन-कीर्तन से भक्तिमय हो उठा।कार्यक्रम के दौरान नन्हे विद्यार्थियों ने भगवान श्री विट्ठल एवं माता रुक्मिणी की आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा धारण कर उनकी मनोहारी झांकी प्रस्तुत की। झांझ, मंजीरे और भजन-कीर्तन की मधुर धुनों पर विद्यार्थियों ने भावपूर्ण नृत्य कर उपस्थित सभी जनों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।देवशयनी एकादशी का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व बताते हुए शिक्षकों ने कहा कि इस तिथि से भगवान श्री विष्णु चार माह के योगनिद्रा काल में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ माना जाता है, जिसके दौरान साधना, भजन, जप, व्रत, सेवा और आध्यात्मिक चिंतन का विशेष महत्व होता है। महाराष्ट्र सहित देश के अनेक भागों में इस दिन भगवान श्री विट्ठल-रुक्मिणी की भव्य पूजा-अर्चना की जाती है तथा संत परंपरा के वारकरी भक्त पंढरपुर धाम पहुंचकर कीर्तन और दर्शन करते हैं। यह परंपरा भक्ति, समर्पण, सेवा, समानता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देती है।विद्यालय परिवार ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, संत परंपरा तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराना है, ताकि उनमें बचपन से ही संस्कार, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का विकास हो। कार्यक्रम के अंत में समस्त विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भगवान श्री विट्ठल-रुक्मिणी से विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना की।

